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आधुनिक व सभ्य समाज के निर्माण के लिए लड़के व लड़की दोनो को समान रूप से शिक्षित करना होगा : डा अनुपमा साहा

सिरोही ब्यूरो न्यूज़

संयोजक हरीश दवे

सिरोही महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ, महिला उत्पीड़न शिकायत निवारण समिति एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में लैंगिक संवेदीकरण के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के संकाय सदस्यों को लैंगिक भेदभाव के प्रति संवेदनशील एवं जागरूक होने के लिये प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में राजनीति विभाग के प्रभारी डाॅ. नवनीत कुमार वर्मा ने बताया कि लिंग भेद समाज की बनायी व्यवस्था है। उन्होनें बताया कि असमानता के दो स्त्रोत है, पहला प्राकृतिक तथा दूसरा मानव निर्मित।

मानव निर्मित असमानताओं से उत्पन्न समस्याओं से आज का समाज जूझ रहा है। 20वीं शताब्दी में पूरे विश्व में महिलाओं की समानताओं को लेकर आन्दोलन हुये और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कदम उठाये गये तथा 20वीं सदी के अन्त तक इसके लिये कानून बनाये गये। इसी क्रम में महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डाॅ. अनुपमा साहा ने समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक सत्ता के बारे में बताया, इस व्यवस्था से स्त्रियों को किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इससे अवगत करवाया।

उन्होनें बताया कि समाज में बढ़ते दुराचार का कारण गलत लालन-पालन है। आधुनिक एवं सभ्य समाज का निर्माण करने के लिये हमें लडके व लडकी दोनों को समान भाव से शिक्षित करना होगा। रूपन देवल बजाज और भंवरी देवी केस का उदाहरण देते हुए समाज में व्याप्त असमानता को व्यक्त किया। 

महिला उत्पीड़न शिकायत निवारण समिति की प्रभारी डाॅ. उषा चैहान ने कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति होने वाले यौन उत्पीड़न लिये बनाये गये कानून की जानकारी प्रदान की। महिलाऐं अपने कार्यस्थल पर भयमुक्त वातावरण में गरिमामय तथा सम्मानजनक तरीके से अपने कार्य को सम्पादित कर सके इसके लिये प्रत्येक संस्था प्रभारी को महिलाओं के लिये महिला उत्पीड़न शिकायत निवारण समिति का गठन आवश्यक रूप करना होगा।  

महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. के. के. शर्मा ने बताया कि वैदिक काल में स्त्री और पुरूष के बीच समानता का भाव था। स्त्रियों को अपने निर्णय लेने का अधिकार था, जो मध्यकाल में बदल गया। धीरे-धीरे समाज में पितृसत्तात्मक सत्ता ने जड़े जमा ली। बाणभट्ट की आत्मकथा और सिमोन द बउवार की पुस्तक के उदाहरण के माध्यम से स्त्रियों की स्थिति का वर्णन किया। हमे इस विषय के प्रति संवेदनशील एवं जागरूक होना चाहिये तथा आने वाले पीढ़ी को संवेदनशील बनाना हमारी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. संध्या दुबे ने किया। 

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