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शिक्षक प्रतिनियुक्ति को निदेशक मा.शि.बीकानेर की बंदिश से मुक्त किया जाये - गहलोत

सिरोही ब्यूरो न्यूज़

रिपोर्ट हरीश दवे

सिरोही राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, शिक्षा मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा, मुख्य सचिव निरंजन आर्य, प्रमुख शासन सचिव संस्कृत एवं स्कूली शिक्षा जयपुर को ज्ञापन भेजकर राज्य में शिक्षक प्रतिनियुक्ति को निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर की बंदिश से मुक्त कर रिक्त पदों अथवा एकल विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था हेतु मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी पूर्व की भांति अधिकृत करने की मांग की।

संघ (प्रगतिशील) के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने ज्ञापन में बताया कि करीब 9 महीनें की लंबी अवधि के बाद राज्य की जनप्रिय सरकार की गाइडलाइंस में विद्यालय में रौनक लौटी है। ऐसी विकट परिस्थिति में भी राज्य के तमाम शिक्षक समुदाय ने सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर छात्र प्रवेश से लेकर निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण को जिम्मेदारी से पूरा किया है। यही कारण है कि राज्य भर के विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश का आंकडा बढ़ा है। अभिभावकों का राजकीय विद्यालयों की ओर रुझान को स्थाई रखने की अब जिम्मेदारी जिला शिक्षा प्रशासन की बनती है जिससे गहलोत सरकार की जनप्रियता को बनाये रखा जा सके। लेकिन लिखते हुए बडी पीडा हो रही है कि राज्य शिक्षा प्रशासन के प्रमुख अधिकारी सौरभ स्वामी निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर को यह बात या तो समझ नहीं आ रही या वे समझना नहीं चाहते। 9 माह के लोक डाउन के बाद राज्य में अभिभावकों और छात्रों में अध्ययन को लेकर जताई जा रही चिंता विद्यालयों में पडे रिक्त पदों से अध्ययन में बाधा पर यदि माकूल कार्य योजना बनाकर प्रतिनियुक्ति से शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया गया तो शिक्षा तंत्र की साख पर दाग लगने से कोई बचा नहीं सकता। अभिभावक सामूहिक टीसी लेकर अन्यत्र प्रवेश लेने की सोच बना रहे है। किस जिले में किस विद्यालय की छात्र संख्या कितनी है, कितने पद रिक्त है, किस वर्ग समुदाय के छात्र पढ़ते है इसकी भौतिक ही नहीं वास्तविक जानकारी सम्बन्धित जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को ज्यादा होती है। लेकिन बडा दुर्भाग्य हैं कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर ने विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्थार्थ प्रतिनियुक्ति के समस्त अधिकार अपनी कस्टडी में ले लिए है। इससे राज्य का जिला शिक्षा प्रशासन विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था करने को लेकर पंगु सा होकर रह गया है।

जबकि शहरी क्षेत्र की प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय, कस्तुरबा गांधी विद्यालय, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के अधिकांश पद रिक्त होने से शिक्षण व्यवस्था जबरदस्त रूप से प्रभावित हो रही हैं। किसी भी जन प्रतिनिधि, अभिभावकों या एसएमसी के निर्णय पर शिक्षण व्यवस्था के लिए शिक्षक की प्रतिनियुक्ति को लेकर जिला शिक्षा प्रशासन का निदेशालय की ओर मुंह ताकना बडा अजीब सा प्रतीत हो रहा है जिसकी राज्य भर में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने सुनने को मिल रही है।

जबकि निदेशालय द्वारा जिला प्रशासन की मांग पर गैर शैक्षणिक कार्यो में प्रतिनियुक्ति पर तत्काल यस एवं विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थार्थ प्रतिनियुक्ति पर रिजेक्ट करना निदेशालय के दौहरे मापदण्ड एवं पक्षपातपूर्ण रवैये को प्रदर्शित करता हैं।

गहलोत ने मांग की कि राज्य के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था हेतु शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति के अधिकार पूर्व की भांति जिला शिक्षा प्रशासन (मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) को देकर निदेशालय स्तर से इसकी प्रभावी मोनिटरिंग करवाई जावे। निदेशक बीकानेर द्वारा जारी शिक्षक प्रतिनियुक्ति के शाला दर्पण से निदेशालय स्तर से स्वीकृति उपरांत जारी आदेश की प्रथा पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाया जाये। राज्य के सबसे बडे सरकारी महकमे को संभालने के लिए करीब 20 वर्ष की सेवा अनुभव के प्रशासनिक अधिकारी को ही निदेशालय की जिम्मेदारी सौंपी जावे जिससे शिक्षा तंत्र के विशाल महकमे को गम्भीरता से सरकार की भावना अनुरूप सम्भाला जा सके।

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